08 June, 2026 (Monday)

सामरिक खतरों को देखते हुए भारत के रक्षा बजट में ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर

वर्ष 2022-23 के केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र का हिस्सा 5,25,166 करोड़ रुपये है। यह धनराशि 2022-23 के कुल वित्त बजट के 13 प्रतिशत के लगभग है। साल 2021-22 के लिए कुल रक्षा बजट 4,78,196 करोड़ रुपये था। इस तरह रक्षा बजट में करीब 9.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई। इसके साथ ही सीमा पर चल रही सामरिक चुनौतियों का दीर्घकालिक समाधान निकालने के लिए सैन्य साजो सामान के निर्माण में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए विशेष जोर दिया गया है।

भारत के लिए रक्षा बजट का विशेष महत्व इसलिए बढ़ जाता है, क्योंकि भारत के दो सीमाई मोर्चे पर हमेशा तनातनी चलती रहती है। भारत की रक्षा चुनौतियां काफी बढ़ गई हैं। भारत के पुराने प्रतिद्वंद्वी चीन के साथ एलएसी पर तनाव चलते हुए काफी दिन हो चुके हैं। पूर्वी लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में सीमाओं पर चीनी सैन्य अतिक्रमण और रोबोट सेना की तैनाती के प्रयास इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

लद्दाख में चीन की चुनौती को देखते हुए तकरीबन 50 हजार सैनिकों की तैनाती की जा चुकी है। इसके अलावा वहां पर टैंकों, विमानों एवं मिसाइलों की तैनाती कर दी गई है ताकि कभी भी युद्ध की स्थिति से निपटा जा सके। ऐसे में और अधिक रक्षा बजट बढ़ाने की आवश्यकता नजर आ रही थी। पाकिस्तान की सीमा पर खतरे एवं चुनौतियां बरकरार हैं। वह आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराता है तथा उन्हें पाल पोसकर भारत भेजता है, ताकि भारत की तरक्की की रफ्तार को रोका जा सके।

साथ ही चीन की समुद्री क्षेत्र में बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए भारतीय नौसेना के सामने हिंद महासागर से लेकर अरब सागर तक चुनौतियां काफी बढ़ गई हैं। इसके लिए नौसेना युद्ध समूहों के गठन और नौसेना की एयर विंग को मजबूत करना परम आवश्यक हो गया है। हिंद महासागर में उभरते खतरों को देखते हुए नौसेना के बजट में 44.5 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसी तरह वायु सेना के आवंटन में 4.5 प्रतिशत तथा थल सेना के लिए 12.5 प्रतिशत की वृद्धि की गई जो कि कम है।

यह भी सर्व विदित है कि पाकिस्तान व चीन सहित विश्व के अनेक देश भारत की तुलना में सुरक्षा पर अधिक धन खर्च कर रहे हैं। ऐसे में भारत को अपनी सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना आवश्यक हो गया था। सीमा पर तनाव को देखते हुए सैन्य साजो सामान की विशेष आवश्यकता थी। इन्हीं चुनौतियों के कारण भारत सीमावर्ती क्षेत्रों में अपना सुरक्षा ढांचा भी मजबूत कर रहा है। भारत का रक्षा बजट वैसे तो पांच लाख करोड़ रुपये से उपर पहुंच गया है, लेकिन अन्य देशों की तुलना में अभी भी कम है।

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