आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आरक्षण के लिए पारिवारिक आय सीमा को आठ लाख रुपये रखने का फैसला : केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि उसने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (Economically Weaker Sections, EWS) के लिए मौजूदा सकल वार्षिक पारिवारिक आय सीमा को आठ लाख रुपये या उससे कम बनाए रखने के तीन सदस्यीय पैनल की सिफारिश को स्वीकार करने का फैसला किया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि समिति ने सिफारिश की है कि ईडब्ल्यूएस को परिभाषित करने के लिए पारिवारिक आय एक व्यवहारिक मानदंड है। मौजूदा स्थिति में ईडब्ल्यूएस निर्धारित करने के लिए आठ लाख रुपये की वार्षिक पारिवारिक आय सीमा उचित है।
तीन सदस्यीय समिति ने सिफारिश की
एनईईटी-पीजी के लिए दाखिले से संबंधित मामले में दाखिल हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा है कि तीन सदस्यीय समिति ने सिफारिश की है कि केवल वे परिवार जिनकी सालाना आय आठ लाख रुपये तक है वे ही ईडब्ल्यूएस आरक्षण का लाभ पाने के पात्र होंगे। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के सचिव आर. सुब्रह्मण्यम ने केंद्र सरकार की ओर से यह हलफनामा दायर किया है। इसमें शीर्ष अदालत को बताया गया है कि केंद्र सरकार ने समिति की सिफारिशों को स्वीकार करने का फैसला किया है जिसमें नए मानदंडों को संभावित रूप से लागू करने की सिफारिश भी शामिल है।
30 नवंबर 2021 को बनाई थी समिति
मालूम हो कि इस मसले पर केंद्र सरकार ने पिछले साल 30 नवंबर को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। इस समिति में अजय भूषण पांडे (पूर्व वित्त सचिव), वीके मल्होत्रा (सचिव, आईसीएसएसआर के सदस्य) और केंद्र के प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल शामिल थे। अब गेंद सर्वोच्च अदालत के पाले में है। वह ईडब्ल्यूएस के निर्धारण के लिए मानदंड पर फिर से विचार करेगी। इस समिति ने पिछले साल 31 दिसंबर को केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
काउंसलिंग में देरी से डाक्टर हुए थे नाराज
इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (Economically Weaker Sections, EWS) के लिए मौजूदा सकल वार्षिक पारिवारिक आय सीमा आठ लाख रुपये या उससे कम को बरकरार रखा जा सकता है। यानी केवल वे परिवार जिनकी वार्षिक आय आठ लाख रुपये तक है… वही ईडब्ल्यूएस आरक्षण का लाभ पाने के हकदार होंगे। समिति का फैसला आने में देरी के चलते NEET-PG 2021 काउंसलिंग में भी देरी हुई। इस वजह से दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में फेडरेशन आफ रेजिडेंट डाक्टर्स एसोसिएशन (FORDA) के बैनर तले बड़ी संख्या में रेजिडेंट डाक्टरों ने व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन भी किया।
आयसीमा का मानक ओबीसी क्रीमीलेयर से ज्यादा सख्त
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि ईडब्ल्यूएस के लिए आठ लाख रुपये की आयसीमा का मानदंड अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की क्रीमीलेयर के लिए निर्धारित आयसीमा के मानक से कहीं अधिक कड़ा है। मसलन, ओबीसी के लिए आय की गणना लगातार तीन साल की कुल वार्षिक आय से की जाती है जबकि ईडब्ल्यूएस के लिए यह पूर्व वित्तीय वर्ष की आय है। ओबीसी क्रीमीलेयर के लिए वेतन, कृषि और पारंपरिक कारीगरी के पेशों से आय को बाहर रखा गया है जबकि ईडब्ल्यूएस के लिए मानदंड में कृषि समेत सभी स्त्रोतों से आय शामिल है। इसी तरह, ईडब्ल्यूएस परिवार में अभ्यर्थी, उसके माता-पिता, नाबालिग भाई-बहन, पति अथवा पत्नी और उसके नाबालिग बच्चे शामिल हैं। जबकि ओबीसी क्रीमीलेयर के मामले में परिवार में सिर्फ अभ्यर्थी, उसके माता-पिता और नाबालिग बच्चे शामिल हैं।
