20 August, 2026 (Thursday)

21 अगस्त को जंतर-मंतर पर आरक्षण सुधार के मुद्दे पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं, दिल्ली पुलिस ने इजाजत मिलने के दावों को बताया फर्जी

दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण सुधार के मुद्दे पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। 21 अगस्त की इजाजत को लेकर दिल्ली पुलिस ने स्पष्टीकरण जारी किया और कहा कि प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी गई है।
आरक्षण सुधार के मुद्दे पर 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मिलने के दावे को दिल्ली पुलिस ने फर्जी और भ्रामक बताया है। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए किसी को कोई अनुमति नहीं दी गई है। सोशल मीडिया पर अनुमति मिलने से जुड़े कई वीडियो प्रसारित हो रहे हैं, जिन्हें पुलिस ने भ्रामक बताया है।

पूरे नई दिल्ली जिले में जुलूस या प्रदर्शन की अनुमति नहीं
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा पहले से लागू है। इसके तहत प्रदर्शन, जुलूस, मार्च और पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध है।

फर्जी खबर फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी को सोशल मीडिया पर शेयर या फॉरवर्ड न करें। पुलिस ने चेतावनी दी है कि फर्जी खबर बनाने या उसे प्रसारित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति को लेकर पुलिस का स्पष्टीकरण
आरक्षण सुधार को लेकर जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति का दावा पहले भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ था, जिसके बाद पुलिस की ओर से अनुमति को लेकर स्पष्टीकरण दिया गया था।

हाल में NEET पेपर लीक के मुद्दे जंतर-मंतर पर हुआ था प्रदर्शन
गौरतलब है कि इससे पहले हाल ही में NEET पेपर लीक के मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का बड़ा प्रदर्शन हो चुका है। इस दौरान, जंतर-मंतर पर बीते 20 जुलाई को पेपर लीक और एजुकेशन रिफॉर्म्स को लेकर हुए छात्रों के प्रदर्शन में हिंसक झड़पें हो गई थीं। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर और देश भर के छात्रों पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए हाई पावर कमेटी गठित कर दी है।

बल प्रयोग किए जाने के आरोपों की स्वतंत्र-निष्पक्ष जांच जरूरी- SC
गौरतलब है कि सर्वोच्च अदालत ने जंतर-मंतर और देश के दूसरे भागों में हुए स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट के दौरान सुरक्षाबलों और पुलिस की कार्रवाई की पड़ताल के लिए High-Power Inquiry Committee बनाई है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि प्रदर्शनकारियों पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किए जाने के आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है।

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