24 October, 2026 (Saturday)

क्या है 1998 का वह मामला, जिसमें कांग्रेस विधायक को 3 साल की जेल, विधायकी गई, अब वापस कैसे मिलेगी? क्या है नियम?

बैंक से अनुचित तरीके से ब्याज वसूलने के मामले में राजेंद्र भारती की विधायकी जा चुकी है। हालांकि, उनके पास हाईकोर्ट में अपील कर अपनी सदस्यता वापस पाने का विकल्प है।
मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही उनकी विधानसभा सदस्यता जा चुकी है। जल्द ही राज्य में उपचुनाव की तैयारी भी शुरू हो जाएगी। हालांकि, कांग्रेस पार्टी राजेंद्र भारती की विधायकी बचाने के जतन में जुट गई है। आइए जानते हैं कि राजेंद्र भारती को किस मामले में सजा सुनाई गई है? सजा होने के बाद विधायकी क्यों रद्द हुई? क्या विधायकी वापस मिल सकती है और अगर मिल सकती है तो इसका तरीका क्या है?
किस मामले में हुई सजा?
राजेंद्र भारती की मां सावित्री ने 24 अगस्त, 1998 को जिला सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक में श्री श्याम सुंदर श्याम जन सहयोग एवं सामाजिक विकास संस्थान के नाम पर तीन साल के लिए 10 लाख रुपये की एफडी की थी। इसमें हर साल 13.5 फीसदी ब्याज मिलना था। एफडी का समय पूरा होने पर पैसा निकालने की बजाय राजेंद्र भारती दस्तावेजों में गड़बड़ी करके ब्याज लेना जारी रखा। उन्होंने 1999 से 2011 तक प्रतिवर्ष 1.35 लाख रुपये का ब्याज निकाला। लगभग 18.5 लाख रुपये अवैध रूप से ब्याज के रूप में निकाले गए। इसमें रघुबीर शरण प्रजापति ने भी राजेंद्र भारती का साथ दिया। सावित्री श्याम और उनके बेटे राजेंद्र भारती के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 200 के तहत 29 जुलाई, 2015 को शिकायत दर्ज की गई और लगभग 11 साल बाद दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने सजा सुनाई। सावित्री श्याम का निधन हो चुका है। वहीं, राजेंद्र भारती को तीन साल, जबकि रघुबीर शरण को एक साल की सजा हुई। सजा सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि पैसे वसूलना जेल भेजे जाने से ज्यादा न्यायपूर्ण होगा और एक लाख का जुर्माना लगाया।

क्यों रद्द हुई विधायकी?
संविधान के अनुच्छेद 191(1)(e) और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 के तहत, यदि किसी विधायक को 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। भारती को तीन साल की सजा हुई है। ऐसे में सजा होने के साथ ही उनकी सदस्यता रद्द हो गई है। इस स्थिति में विधायकों को सैलरी और भत्ते मिलना भी बंद हो जाते हैं। भारती के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई है।

क्या वापस मिल सकती है विधायकी?
राजेंद्र भारती को दोबारा विधायक बनने के लिए अब ऊपरी अदालत से इस फैसले पर स्टे हासिल करना होगा। ऐसा करने पर उनकी विधायकी बहाल हो जाएगी। अगर वह ऐसा नहीं कर पाते हैं तो सजा की अवधि समाप्त होने के बाद वह 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इसके बाद ही दोबारा चुनाव लड़कर वह जीतने पर विधायक बन सकते हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय ने उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया है। ​इस संबंध में सचिवालय द्वारा असाधारण राजपत्र भी जारी कर दिया गया है। ​विधानसभा सचिवालय ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर सूचित कर दिया है कि दतिया विधानसभा क्षेत्र की सीट अब रिक्त हो चुकी है।

कैसे वापस मिलेगी विधायकी?
राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को भारती हाईकोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। अगर हाईकोर्ट निचली अदालत के फैसले पर स्टे लगा देता है तो उनकी विधायकी बहाल हो सकती है। हालांकि, सिर्फ सजा पर स्टे लेने से विधायकी बहाल नहीं होती। दोष सिद्धि पर भी स्टे लेना जरूरी है। भारती को यह स्टे 60 दिन के अंदर हासिल करना होगा। राजेंद्र भारती की सदस्यता बचाने के लिए कांग्रेस अब कानूनी मोर्चे पर सक्रिय हो गई है। सूत्रों के अनुसार ​कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता कपिल सिब्बल एवं विवेक तंखा उच्च न्यायालय में इस फैसले को चुनौती दे सकते हैं ​बचाव पक्ष की मुख्य कोशिश सजा पर स्टे प्राप्त करने की होगी।

कौन हैं राजेंद्र भारती?
राजेंद्र भारती का जन्म 1958 में दतिया में हुआ था। उन्होंने शुरुआती शिक्षा यहीं हासिल की। इसके बाद 1978 में जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर से बीए 1983 में डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर से एलएलबी की। उनके पिता श्याम सुंदर श्याम पूर्व विधायक और मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री थे। ऐसे में राजनीति उन्हें विरासत में मिली। वह पेशे से वकील और राजनेता हैं। उन्होंने 8 चुनाव लड़े और 3 में जीत हासिल की। पहली बार 1985 में वह विधायक बने थे। 1998 में दूसरी और 2023 में तीसरी बार विधायक बने। 2023 में उन्होंने पूर्व गृहमंत्री और बीजेपी के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा को हराया था। इससे वह चर्चा में आए थे।

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