22 September, 2026 (Tuesday)

वंदे मातरम् के 6 अंतरे अनिवार्य करने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केंद्र से 2 हफ्ते में जवाब तलब

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि करीब 80 साल बाद पहली बार इसे लोगों पर थोपा जा रहा है और नहीं गाने पर सजा का प्रावधान किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 2 हफ्ते में
वंदे मातरम् को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से नोटिस नहीं जारी करने की मांग की और कहा कि यह सनसेशन को बढ़ावा देने वाला होगा। जस्टिस बागची ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि यह हमारा राष्ट्रीय गीत है। एसजी ने कहा कि दो पद गाए जाएं या छह पद गाए जाएं। यह सरकार से इतर कौन तय करेगा, कोई और तो नहीं कर सकता।

याचिकाकर्ता ने कहा- लोगों की राय ली जानी चाहिए थी
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि लोगों की राय ली जानी चाहिए थी। जस्टिस बागची ने कहा कि यह सही बात है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से दो सप्ताह में जवाब तलब किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वंदे मातरम् नहीं गाने पर किसी तरह की कानूनी या आपराधिक सजा देने के प्रावधान की जांच जरूरी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से 2 हफ्ते में जवाब मांगा है। यह मामला वंदे मातरम् को राष्ट्रगान के समान कानूनी सुरक्षा देने के लिए किए गए संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश डॉ. एस. मुरलीधर ने कहा कि करीब 80 साल बाद पहली बार इसे लोगों पर थोपा जा रहा है और नहीं गाने पर सजा का प्रावधान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसे लागू करने से पहले देश के लोगों के बीच सहमति बननी चाहिए। जस्टिस जॉयमाला बागची ने कहा कि सजा से जुड़े प्रावधान की जांच की जरूरत है। वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता इतनी संकीर्ण नहीं हो सकती। कोर्ट ने केंद्र को याचिका की कॉपी देने को कहा है और दो हफ्ते में जवाब मांगा है।
संगीतकार टीएम कृष्णा ने दायर की है याचिका
कर्नाटक संगीतकार टीएम कृष्णा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर केंद्र के उस सर्कुलर को चुनौती दी है, जिसमें वंदे मातरम् के छह अंतरे गाना जरूरी किया गया है। कृष्णा ने हाल में किए गए उस संशोधन को भी चुनौती दी है, जिसके तहत वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने की बात कही गई है। याचिका में कहा गया है कि वंदे मातरम के चार अंतरों में हिंदू देवी-देवताओं के प्रति भक्ति का साफ तौर पर जिक्र है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन हिस्सों को गाना अनिवार्य करना देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के खिलाफ है।

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