16 October, 2026 (Friday)

पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा को हाई कोर्ट से झटका, PMLA केस में जमानत याचिका खारिज

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के नेता और पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद वे अब सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने शुक्रवार को पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अरोड़ा ने ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002’ (PMLA) के तहत अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने कानूनी सुरक्षा उपायों और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अपनी गिरफ्तारी, गिरफ्तारी के आधार और रिमांड आदेश को रद्द करने की मांग की।

मंत्री ने कोर्ट में दिया ये तर्क

संजीव अरोड़ा ने तर्क दिया कि वह पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और राज्यसभा के पूर्व सांसद रह चुके हैं। समाज में उनकी गहरी पैठ है और उनका सार्वजनिक रिकॉर्ड बेदाग रहा है। अरोड़ा ने यह भी तर्क दिया कि वह 9 मई से हिरासत में हैं। पीठ को यह भी बताया गया कि गुरुग्राम में ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (PMLA) के तहत विशेष न्यायाधीश के समक्ष याचिकाकर्ता द्वारा दायर नियमित जमानत अर्जी 15 जून को खारिज कर दी गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि वह ‘मैसर्स हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड’ (HSRL) के प्रमोटर और चेयरमैन हैं। 1987 में बनी यह कंपनी कई तरह के व्यावसायिक कार्यों में शामिल है। उनके वकील ने आगे कहा कि कैबिनेट मंत्री का पद संभालने के बाद याचिकाकर्ता ने कंपनी के रोजमर्रा के कामकाज में हिस्सा लेना बंद कर दिया था।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला बुनियादी तौर पर त्रुटिपूर्ण है, क्योंकि प्रतिवादी पक्ष यह साबित करने में विफल रहा है कि कोई ऐसा ‘अनुसूचित अपराध’ (scheduled offence) हुआ है, जिससे अपराध से प्राप्त आय उत्पन्न हुई हो और जिसका संबंध याचिकाकर्ता से हो। अरोड़ा ने तर्क दिया कि जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों से PMLA के प्रावधानों के तहत किसी अपराध के आवश्यक तत्व सामने नहीं आते हैं। ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया जिससे यह साबित हो सके कि याचिकाकर्ता ने अपराध से प्राप्त कथित आय को छिपाने, अपने पास रखने, हासिल करने, इस्तेमाल करने या उसे वैध दिखाने में कोई भूमिका निभाई हो।

मंत्री बोले- ईडी के पास नहीं है कोई सबूत

याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रतिवादी द्वारा याचिकाकर्ता के घर, उसके बेटे के आवास और HSRL के कार्यालय परिसर में व्यापक तलाशी ली गई, लेकिन कोई भी आपत्तिजनक दस्तावेज, बिना हिसाब-किताब वाली संपत्ति, डिजिटल रिकॉर्ड या ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि याचिकाकर्ता ने कोई अपराध किया है।

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