05 November, 2026 (Thursday)

कांग्रेस ज्यादा सांसद कैसे जिता सकती है? किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी को दी ये 7 सलाह

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर के कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को 7 सलाह दी है। रिजिजू ने कहा है कि अगर राहुल ये सलाह मान लें तो कांग्रेस ज्यादा सांसद जिता सकती है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पार्टी के सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है। किरेन रिजिजू ने बुधवार को एक पोस्ट कर के राहुल गांधी को सफल होने के लिए 7 सलाह दी है। किरेन रिजिजू ने कहा है कि अगर राहुल गांधी इन सलाह पर अमल कर लें तो वह कांग्रेस पार्टी की सीटों में इजाफा कर सकते हैं। बता दें कि बीते कुछ दिनों से सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं के बीच लगातार जुबानी जंग चल रही है। आइए जानते हैं कि किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी को कौन सी 7 सलाह दी है।

किरेन रिजिजू ने क्या सलाह दी?
भारत के केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को अपने आधिकारिक X हैंडल पर ट्वीट किया और कहा- अगर राहुल गांधी जी ये कदम उठाएं, तो कांग्रेस पार्टी अधिक सांसद जिता सकती है-:

भारत में अधिक समय बिताएं और बार-बार चुपचाप विदेश यात्राओं पर जाने से बचें।
वरिष्ठों का सम्मान करें और उनसे बहुमूल्य सीख लें, जैसा कि भारतीय परंपरा रही है।
भारत-विरोधी लोगों से न मिलें और उनके एजेंडे को बढ़ावा देना बंद करें।
भाजपा, आरएसएस और मोदी जी के प्रति गहरी नफरत खत्म करें। भाजपा को अपना राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानें, दुश्मन नहीं।
संसद को अधिक गंभीरता से लें और सांसदों को बहसों और चर्चाओं में हिस्सा लेने दें।
भारत के संविधान का सम्मान करें और संवैधानिक संस्थाओं का मान रखें।
कांग्रेस पार्टी को एक लोकतांत्रिक दल के रूप में काम करने दें और परिवारवादी राजनीति को खत्म करें।
समझदार और परिपक्व लोगों के बीच होती है बहस
आपको बता दें कि राहुल गांधी बीते कई दिनों से केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। हाल ही में राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी को डिबेट की चुनौती दी है। इसी के बाद से भाजपा नेता राहुल गांधी पर हमलावर हैं। इस मुद्दे पर भी किरेन रिजिजू मे राहुल गांधी पर निशाना साधा और कहा- संसद बहस और चर्चा की जगह है। लेकिन जो लोग लोकतंत्र, बहस और चर्चा में विश्वास ही नहीं रखते, वे अब बहस की बात कर रहे हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे इस्लामी कट्टरपंथी धर्मनिरपेक्षता की बात करें, अलगाववादी भारतीय झंडा थामें, या अराजकतावादी संविधान की किताब दिखाएं। भारत के दुश्मनों के एजेंडे को आगे बढ़ाना और फिर दूसरों पर विदेशी समर्थन का आरोप लगाना- यह खुद का ही मजाक उड़ाने जैसा है। टॉप लेवल की डिबेट समझदार और परिपक्व लोगों के बीच होती हैं।

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