13 June, 2026 (Saturday)

Coffee Par Kurukshetra: राहुल गांधी का क्षेत्रीय दलों की राजनीतिक समझ पर उंगली उठाना INDI गठबंधन को पड़ेगा भारी? देखें पूरी चर्चा

इंडिया टीवी के लोकप्रिय शो “कॉफी पर कुरुक्षेत्र” में INDI गठबंधन के भीतर खींचतान पर चर्चा हुई। साथ ही, ये भी बात हुई कि क्या राहुल गांधी का साथी क्षेत्रीय दलों की सियासी समझ पर सवाल उठाना INDI गठबंधन को भारी पड़ सकता है।
नई दिल्ली: इंडिया टीवी के लोकप्रिय शो “कॉफी पर कुरुक्षेत्र” में शुक्रवार (12 जून) को इस मुद्दे पर चर्चा हुई कि क्या राहुल गांधी के घमंड के कारण INDI गठबंधन टूट जाएगा। और क्या पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के बाद अब महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और शरद पवार के सांसद-विधायक भी टूटेंगे। चर्चा में शो के एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा और इंडिया टीवी के पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पराशर के साथ मेहमान के तौर पर प्रदीप सिंह और मनोज कुमार सिंह मौजूद रहे।

INDI गठबंधन में आपसी तालमेल पर खड़े हुए सवाल
कार्यक्रम में बात हुई कि INDI गठबंधन की हालिया बैठक को लेकर सियासी गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है। बैठक के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सहयोगी दलों के नेताओं को संबोधित करते हुए कई ऐसी बातें कहीं, जिनसे विपक्षी खेमे के भीतर नेतृत्व, रणनीति और आपसी तालमेल को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

राहुल गांधी ने क्षेत्रीय दलों को बताया “कन्फ्यूज”
राहुल गांधी ने विपक्षी दलों के नेताओं से कहा कि वे मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर “कन्फ्यूज” हैं, जबकि कांग्रेस और वह खुद स्थिति को बेहतर ढंग से समझते हैं। कथित तौर पर उन्होंने यह भी कहा कि देश में चुनावी मुकाबला अब समान परिस्थितियों में नहीं हो रहा है और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा है। राहुल गांधी ने विपक्षी दलों से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट रहने और सरकार के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान भी किया।

क्षेत्रीय दलों की राजनीतिक समझ पर उठाया सवाल
बहस में शामिल राजनीतिक विश्लेषकों और पैनलिस्टों ने राहुल गांधी के कथित बयान की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की भाषा सहयोगी दलों को असहज कर सकती है। उनका तर्क था कि समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, आरजेडी, डीएमके और अन्य क्षेत्रीय दल अपने-अपने राज्यों में लंबे राजनीतिक संघर्ष के बाद स्थापित हुए हैं, इसलिए उन्हें राजनीतिक समझ का पाठ पढ़ाना विपक्षी एकता के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

अपने गिरेबान में नहीं झांक रही कांग्रेस
चर्चा के दौरान राहुल गांधी के उस कथित स्टेटमेंट पर भी प्रश्न उठाए गए जिसमें उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव को विपक्ष की “जीत” बताया था। आलोचकों का कहना था कि चुनाव परिणामों की अलग-अलग व्याख्या करने के बजाय विपक्ष को अपनी राजनीतिक कमजोरियों पर ध्यान देना चाहिए। वहीं, यह भी कहा गया कि कांग्रेस को पहले उन राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत करने की जरूरत है, जहां वह दशकों से सत्ता से बाहर है।

INDI गठबंधन में झलकती है विश्वास की कमी
कार्यक्रम में विपक्षी नेताओं और कांग्रेस के रिश्तों पर भी चर्चा हुई। पैनलिस्टों का दावा था कि कई क्षेत्रीय दल कांग्रेस के साथ केवल राजनीतिक मजबूरी में गठबंधन कर रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर विश्वास और तालमेल की कमी बनी हुई है।

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