23 October, 2026 (Friday)

बलूचिस्तान: भीषण संघर्ष में 145 विद्रोही ढेर, सुरक्षाबलों और नागरिकों सहित 50 से अधिक मौतें

इस्लामाबाद,(ईएमएस)। पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत इस समय भीषण हिंसा और सैन्य संघर्ष की आग में झुलस रहा है। पिछले कई दशकों में इस क्षेत्र ने ऐसा खूनी मंजर नहीं देखा, जैसा बीते कुछ घंटों में देखने को मिला है। विद्रोही संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) द्वारा किए गए श्रृंखलाबद्ध हमलों के जवाब में सुरक्षाबलों ने एक व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया है, जिसमें अब तक 145 विद्रोहियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। इस हिंसक टकराव में पाकिस्तान के 17 सुरक्षाकर्मी भी अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि विद्रोहियों के हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत 18 आम नागरिकों की भी मौत हुई है।
प्रांत के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने क्वेटा में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि पिछले 40 घंटों से जारी आतंकवाद विरोधी अभियानों में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने पुष्टि की कि मारे गए सभी 145 विद्रोहियों के शव प्रशासन के कब्जे में हैं और उनकी शिनाख्त की प्रक्रिया चल रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह प्रांत के इतिहास में किसी एक अभियान में मारे गए विद्रोहियों की अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। विद्रोहियों ने क्वेटा, मस्तुंग, नुश्की, ग्वादर और पसनी जैसे एक दर्जन से अधिक स्थानों पर सुरक्षा ठिकानों, सरकारी कार्यालयों और जेलों को निशाना बनाया था। रिपोर्टों के अनुसार, हमलों के दौरान एक डिप्टी डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर का अपहरण भी कर लिया गया है। अभियान के दौरान सेना ने बताया कि विद्रोहियों ने दो महिला आत्मघाती हमलावरों का भी इस्तेमाल किया, जिन्होंने पसनी और क्वेटा में विस्फोट किए। सेना के आधिकारिक बयान के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों को क्वेटा पर बड़े हमले की पूर्व सूचना थी, जिसके चलते सुरक्षा बल अत्यधिक सतर्क थे और 12 अलग-अलग स्थानों पर विद्रोहियों के प्रयासों को नाकाम कर दिया गया। भीषण मुठभेड़ के दौरान तीन आत्मघाती हमलावरों सहित 92 आतंकवादियों को अकेले क्वेटा के आसपास ढेर किया गया। इस हिंसक तनाव के बीच पूरे बलूचिस्तान में जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है।
प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से इंटरनेट सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी हैं। सड़क और रेल यातायात पूरी तरह बाधित है, जिससे प्रांत का संपर्क देश के अन्य हिस्सों से कट गया है। स्थानीय निवासी खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। क्वेटा के एक दुकानदार हमदुल्लाह ने स्थिति की भयावहता बताते हुए कहा कि अब घर से बाहर निकलने का मतलब जान हथेली पर लेकर चलना है, क्योंकि बाहर निकलने के बाद सुरक्षित लौटने की कोई गारंटी नहीं रह गई है। सड़कों और बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग घरों में कैद हैं। हमेशा की तरह अपनी आंतरिक विफलता और अशांति के लिए पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत पर आरोप मढ़ने की कोशिश की है। हालांकि, भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पाकिस्तान का पुराना हथकंडा करार दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अपनी घरेलू समस्याओं और शासन की विफलताओं से वैश्विक ध्यान हटाने के लिए ऐसे बेबुनियाद आरोप लगा रहा है। भारत ने सुझाव दिया कि पाकिस्तान को बलूचिस्तान के लोगों की वाजिब मांगों को सुनना चाहिए और वहां जारी मानवाधिकारों के उल्लंघन और अत्याचारों पर लगाम लगानी चाहिए, न कि निर्दोष लोगों पर कहर ढाना चाहिए। फिलहाल बलूचिस्तान में सैन्य अभियान जारी है और स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी हुई है।

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